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एसईसीएल प्रबंधन ने बताई बीएमएस को उनकी औकात

एसईसीएल प्रबंधन ने बताई बीएमएस को उनकी औकात

Posted at: Sep 20 , 2021 by Swadeshvaani
स्वदेश वाणी

कोल इंडिया लिमिटेड

लाख प्रयास के बाद भी जीएम कंजरकर को हसदेव से हटाने में सफल नहीं हुआ बीएमएस

सप्ताहभर भूख हड़ताल के साथ ही चक्का जाम आंदोलन भी नहीं करा सका जीएम का ट्रांसफर

सत्येंद्र सिंह

रांची : कहा जाता है कोल इंडिया में इन दिनों भारतीय मजदूर संघ की बेहतर पकड़ है। लेकिन एसईसीएल प्रबंधन ने बीएमएस को औकात बता दिया। यहां बीएमएस के ना केवल वरीय नेता बल्कि जेबीसीसीआई के सदस्यों को भी मुंह की खानी पड़ी। मामला था इस कंपनी के हसदेव एरिया में एक सूट लेने का। दरअसल बीएमएस के दो आला नेताओं का दौरा हसदेव एरिया में होना तय था। जहां गेस्ट हाउस में इन नेताओं को ठहरने के लिए तीन सूट चाहिए था। इसे लेकर बीएमएस एवं प्रबंधन के बीच ठन गई थी। जीएम जहां दो सूट देने को तैयार थे, वहीं बीएमएस तीन सूट लेने को अड़ा था। मामला एसईसीएल मुख्यालय तक पहुंचा। इसके बाद बीएमएस ने जीएम यूटी कंजरकर को हसदेव एरिया से हटाना अपनी प्रतिष्ठा बना लिया वहीं ऑफिसर एसोसिएशन ने भी इस मामले को लेकर जीएम को नहीं हटाने को लेकर तमाम पदाधिकारी एक हो गए।

बता दें कि जेबीसीसीआई के सदस्य एवं बीएमएस के नेता के लक्ष्मण रेड्डी जुलाई में हसदेव एरिया में दौरे पर गए थे। इस क्रम में उन्हें ठहरने एवं अन्य सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए जेबीसीसीआई के ही वैकल्पिक सदस्य मजहरूल हक अंसारी ने हसदेव एरिया के जीएम से तीन सूट की मांग की। जीएम ने एपीएम के माध्यम से दो सूट दिलवाने का आदेश दे दिया। अंसारी जी को तो चाहिए था तीन सूट। सो इसकी जानकारी रेड्डी जी को दे दी गई। फिर क्या था ? बीएमएस ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बनाया और जीएम को हटाने के लिए इस महीने एक सप्ताह तक भूख हड़ताल पर बैठे रहे। हालांकि अपने एजेंडे में 213 पॉइंट का जिक्र किया गया था लेकिन मुख्य रूप से इनकी मांग थी, जीएम को यहां से हटाया जाए। यूनियन के लोग तो प्रबंधन से यहां तक कहा कि अगर जीएम को नहीं हटा सकते तो एपीएम को भी वहां से हटाया जाए। जैसे तैसे इस भूख हड़ताल को तो लोगों ने छोड़ा लेकिन उसके बाद चक्का जाम आंदोलन की चेतावनी दे डाली। इन्हीं संगठन के लोगों ने तेरह एरिया में से आठ एरिया के लोगों ने चक्का जाम आंदोलन में जाने से इंकार कर दिया। नतीजतन यह आंदोलन टाय टाय फिश हो गया। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सप्ताहभर का भूख हड़ताल और एक दिन का चक्का जाम आंदोलन की चेतावनी भी जीएम कंजरकर को नहीं हिला सका। हालांकि सीएमडी ने इस मामले पर विचार करने का आश्वासन तो दिया था लेकिन सभी डायरेक्टर के साथ-साथ जीएम व एसोसिएशन के लोग इस बात को लेकर अड़ गए कि अधिकारियों की इसमें कोई गलती नहीं है तो उन पर कार्रवाई के तौर पर वहां से नहीं हटाया जाए। आज की तारीख में किसी भी अधिकारी पर कोई कार्यवाही नहीं स्थिति यथावत है।


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